दी बस्‍तर बैण्‍ड (कोयतूर ‍पाड़ ) Koytur Paad : The Bastar Band

बस्‍तर बैण्‍ड, बस्‍तर के लोक एवं पारंपरिक जीवन का सांगीतिक स्‍वर है. इसमें सदियों से चली आ रही आदिम संस्‍कृति एवं संगीत की अनुगूंज है. बस्‍तर बैण्‍ड में समूचे बस्‍तरिया समुदाय के विलुप्‍त होते पारंपरिक, प्रतिनि‍धि लोक एवं आदिम वाद्यों की सामूहिक अभिव्‍यक्ति है.

बस्‍तर में आदिवासी लिंगो देव को अपना संगीत गुरू मानते हैं. मान्‍यता यह भी है कि लिंगो देव ने ही इन वाद्यों की रचना की थी. ‘लिंगो पाटा’ या लिंगो पेन यानी लिंगो देव के गीत या गाथा में उनके द्वारा बजाए जाने वाले विभिन्‍न वाद्यों का वर्णन मिलता है. यद्यपि वर्णन में प्रयुक्‍त कुछेक वाद्य लगभग विलुप्‍त हो चुके हैं, बावजूद इसके बस्‍तर बैण्‍ड के प्रयासों में विलुप्‍तप्राय: इन वाद्यों को सहेजकर उन्‍हें प्रस्‍तुत किया जा रहा है. बस्‍तर बैण्‍ड में कोइतोर या कोया समाज जिनमें मुरिया, दण्‍डामी माडिया, धुरवा, दोरला, मुण्‍डा, माहरा, गदबा, भतरा, लोहरा, परजा, मिरगिन, हलबा आदि तथा अन्‍य कोया समाज के पारंपरिक एवं संस्‍कारों में प्रयुक्‍त वाद्य संगीत, सामूहिक आलाप-गान को प्रस्‍तुत किया जा रहा है.

बस्‍तर बैण्‍ड के वाद्यों में माडिया ढोल, तिरडुडी़, अकुम, तोडी़, तोरम, मोहिर, देव मोहिर, नंगूरा, तुड़बुडी़, कुण्‍डीड़, धुरवा ढोल, डण्‍डार ढोल, गोती बाजा, मुण्‍डा बाजा, नरपराय, गुटापराय, मांदरी, मिरगीन ढोल, हुलकी मांदरी, कच टेहण्‍डोर, पक टेहण्‍डोर, उजीर, सुलुड, बांस, चरहे, पेन ढोल, ढुसीर, कीकीड, चरहे, टुडरा, कोन्‍डोडका, हिरनांग, झींटी, चिटकुल, किरकीचा, डन्‍डा, धनकुल बाजा, तुपकी, सियाडी बाजा, वेद्दुर, गोगा ढोल आदि प्रमुख एवं संगत स्‍वर थाप, लय, सुर में उन्‍मुक्‍त हैं.